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Barabanaki: जब तक सविनय विरोध होगा तब तक जिन्दा रहेंगे गांधी- राहुल देव

 

Barabanaki News... गांधी की हत्या हर रोज हो रही है। पूरे मुल्क में सैकड़ों जगह उन्हें मारा जा रहा है। उससे क्या वह मर गए? गांधी के शरीर को मारने से क्या वह मर गए? नहीं। हम लोग आज यहां बैठकर उन्हें याद कर रहे है यही गांधी के जिन्दा होने का सबूत है। जब तक हम बिना दूसरे से नफ़रत किए उसका विरोध कर सकते है यानि सविनय विरोध कर सकते है तब तक गांधी जिन्दा रहेंगे। यह बात गांधी भवन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 78वें बलिदान दिवस पर आयोजित महात्मा गांधी स्मृति व्याख्यान के मुख्य वक्ता देश के सुप्रसिद्ध पत्रकार एवं गांधीवादी अध्येता राहुल देव ने कही।

 राहुल देव ने आगे कहा कि हम अपनी पीढ़ी तक अगर गांधी को नहीं पहुंचा पाए, तो गांधी की जय बोलने से कोई फायदा नहीं है। ये हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जिस जहरीले समय में हम रह रहे हैं अभी, यह सोंचकर डर लगता है कि हम अपनी आंखों के सामने ये देख रहे हैं कि हमारे बच्चे और हमारे बच्चों के बच्चे जब बड़े होंगे, नागरिक बनेंगे तब उस वक्त का माहौल, वह हवा कैसी होगी, कितनी जहरीली होगी और उसमें वह जिएंगे कैसे ? हमें कभी अपने बच्चों के भविष्य के लिए हिम्मत करनी चाहिए। गांधी को याद करना, गांधी की बात करना आज एक हिम्मत का काम है। जबकि गांधी को गाली देने वाले और धर्म के नाम पर अधर्म करने वालो को हिम्मत दिखाने जरूरत नहीं पड़ती। हमें समय निकालकर गांधी को थोड़ा-थोड़ा पढ़ना चाहिए। उससे बहुत ताकत मिलती है। गांधी से बड़ा हिन्दू पिछले दो सौ साल में नहीं हुआ। उनसे बड़ा इंसान दूसरा कोई नहीं हुआ।

 शुक्रवार को गांधी भवन में प्रातः 11 बजे दो मिनट को मौन रखकर महात्मा गांधी का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किया गया। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह ने कहा कि हिन्दू-मुस्लिम एकता गांधीजी के जीवन का मूलमंत्र था। इस महामानव के इस मिशन को समकालीन राजनीति ने बहुत नुकसान पहुंचाया है। हम यह नहीं भूल सकते कि गांधीजी के सीने को तीन गोलियों से छलनी करने वाला व्यक्ति हिन्दू राष्ट्रवाद (हिन्दुत्व) की विचारधारा का कट्टर समर्थक था। यह विचारधारा राष्ट्रीय आंदोलन की विचारधारा के एकदम विपरीत थी। 

 पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविन्द कुमार सिंह गोप ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी ताकत से लड़ने एक निहत्था निकला, जो जीवन भर निहत्था रहा, उसने उस साम्राज्य को झुका दिया और मजबूर कर दिया कि वह भारत से बाहर जाए। जिसे पूरी दुनिया महात्मा गांधी के नाम से जानती है। कार्यक्रम संयोजक राजनाथ शर्मा ने कहा कि गांधी का मार्ग सत्य, अहिंसा और संवाद का है। आज दुनिया को हथियारों की नहीं, इन्हीं मूल्यों की ज़रूरत है।

 सभा की अध्यक्षता ईदगाह कमेटी के अध्यक्ष एवं समाजसेवी मो. उमेर किदवई ने की। सभा का संचालन पाटेश्वरी प्रसाद ने किया। सभा को वरिष्ठ पत्रकार अनिल त्रिपाठी, दीपक मिश्र, वरिष्ठ अधिवक्ता शऊर कामिल किदवई, वरिष्ठ सपा नेता हुमायूं नईम खान, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शिवशंकर शुक्ला ने भी सम्बोधित किया। सभा में मुख्य रूप से शिक्षाविद् अशोक शुक्ला, वरिष्ठ सपा नेता प्रमोद वाजपेयी, पूर्व प्रधान ज्ञान सिंह यादव, सलाउद्दीन किदवई, मृत्युंजय शर्मा, समाजसेवी सिद्धार्थ अवस्थी, विनय कुमार सिंह, विजय पाल गौतम, अहमद सईद किदवई, आकाश त्रिपाठी, दानिश आजम वारसी, तौकीर कर्रार, हशमत अली गुड्डू, साकेत संत मौर्य, निशात अहमद, रंजय शर्मा, नीरज दूबे, सत्यवान वर्मा, राम मनोरथ वर्मा, शिवनारायण गौतम आदि कई लोग मौजूद रहे।

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