दालचीनी kif 'Ceylon cinnamon'
Family:लाउरीने
मिजाज:दूसरे दर्जे मे गर्म खुशक
यूनानी हकीम 'सावफरिसतुस' ने अपनी किताब में किया है जिक्र,तौरेत में है जिक्र
दालचीनी या दारचीनी एक दरख्त की खुशबूदार छाल है। जिसका मजा तीखा और चरपरा होता है। दवाओं के अलावा खाने के मसालों में भी इसका इस्तेमाल होता है।
फायदे
इसकी छाल,छाल का पाउडर और इसका तेल दवा के तौर पर इस्तेमाल होता है। ये जिगर, मेदे को ताकत देता है,दांतो को मजबूत करता है, दांत के दर्द में दालचीनी के तेल की फुरेरी लगाने से दर्द खत्म हो जाता है। त्वचा रोग में छीप,झाई को दूर करती है,खांसी, सांस फूलने मे पाउडर को शहद के साथ मिलाकर चाटने या दालचीनी का जोशांदा पीने से फायदा होता है,जहरीले कीड़े बर्र, बिच्छू काटने पर तेल लगाने से राहत मिल जाती है। जाड़ो मे सिर दर्द होने पर माथे पर लेप लगाने से सिर दर्द खत्म हो जाता है। इसका तेल (तिला) अजो खास पर लगाने से कमजोरी दूर होती है और तनाव बढ़ जाता है।
(इस्तेमाल :पाउडर 1से 2 ग्राम ,तेल 2 से 5 बूंद,साबुत 2 से 3 ग्राम)
सुगर और कोलेस्ट्राल भी करती है कम
कुछ रिसर्च और तहकीक से पता चला है कि अगर सुगर के मरीज अपनी रोजमर्रा की खुराक मे दालचीनी 1 ग्राम या पाउडर 1/4 (चौथाई)चम्मच इस्तेमाल करें, तो सुगर लेवल पर कन्ट्रोल रखा जा सकता है,
अगर किसी मरीज को दालचीनी पाउडर 1 ग्राम कैप्सूल मे रख कर 40 दिन खिलाने के बाद टेस्ट कराया जाए तो सुगर भी कम होती है और कोलेस्ट्राल भी कम हो जाता है।
एंडरसन का कहना है कि अगर एक छोटा टुकड़ा दालचीनी का (2 से 3 ग्राम ) एक कप पानी मे चाय की तरह खौला कर 40 रोज पिया जाए, तो सुगर, कोलेस्ट्राल और फैटी लीवर की समस्या 30% तक कम हो जाती है
नोट: ज्यादा मिकदार मे लेने से कब्ज और तेजाबियत हो सकती है।
डॉक्टर (हकीम)ए.एच.उस्मानी, बाराबंकी
Ceylon cinnamon
Healt
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