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Barabanki: सपा में नए नेताओं की एंट्री, बढ़ाएगी वर्चस्व की जंग और टिकटों की मारामारी

 

Barabanki News.... विधानसभा चुनाव करीब आते ही प्रदेश में पार्टी को छोड़ने और पकड़ने का दौर शुरू हो गया है। इससे जहां एक ओर नये समीकरण बन रहे हैं। वहीं दूसरे ओर पार्टियों के स्थापित नेताओ के वर्चस्व कम होने, गुटबाजी और टिकट के लिए मारामारी भी बढ़ने की उम्मीद है। जिले में भी इसका असर पड़ेगा। इसका असर भी देखने को मिलने लगा है। 


ज्ञात हो कि अभी कुछ दिन पहले बसपा के बाद कांग्रेस के रास्ते पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दकी सपा में शामिल हुए थे। धूमधाम से उनकी ज्वाइनिंग हुई थी। सपाई इतने खुश थे कि अब 100 नहीं 1000 प्रतिशत मुस्लिम वोट सपा में आ जाएगा। बाकी पार्टियां डगन लगाए मुस्लिमों के लिए बैठी ही रहेंगी। खैर उनकी ग्रैंड इंट्री हो गई। खुशी का दौर थमा और नसीमुद्दीन सिद्दीकी का सपा में शामिल होने के बाद पहली बार 16 मार्च को जिले की सिरौलीगौसपुर तहसील के मैलारायगंज गांव में रोजा इफ्तार में आना हुआ, लेकिन नसीमुद्दीन की आमद जिले में सपा के स्थापित वर्चस्व वाले नेताओं को नहीं भाई। हालत ये हुई कि सपा के एक नेता को आधा इफ्तार ही छोड़कर जाना पड़ा, तो वहीं इस क्षेत्र के सपा विधायक निमंत्रित होने के बावजूद नहीं पहुंचे, हां उन्होंने अपने बेटे को जरूर भेजा। इसके बाद मैलारायगंज में इफ्तार के आयोजक एहफाज हुसैन, शिब्ली और उनकी टीम के द्वारा जोरदार और भव्य स्वागत किया गया, लेकिन इस कार्यक्रम के बाद से ही सियासी कयास और चर्चाएं तेज हो गईं। 

दरअसल कांग्रेस में रहते हुए पूर्व सांसद पीएल पुनिया से करीबी की वजह से नसीमुद्दीन सिद्दीकी का जिले में काफी आना-जाना लगा रहता था। कहा ये भी जाता है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने जिले में कई कॉलेज और भी कई संपत्तियां बनवा रखी हैं। इसकी वजह से उनका यहां से खास लगाव तो है ही साथी यहां से उनकी सियासी महत्वाकांक्षाएं भी हैं। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस में रहते हुए वो कुर्सी विधानसभा क्षेत्र से सियासी संभावनाएं तलाश रहे थे। कुर्सी विधानसभा क्षेत्र मुस्लिमों के लिए जातीय समीकरण के हिसाब से ठीक मानी जाती है। इस लिए हर सियासी मुस्लिम नौबढ़िया कुर्सी क्षेत्र में अपना झंडा गाड़ने की कोशिश करता है। मुस्लिमों के लिए कुर्सी विधानसभा के बाद रामनगर विधानसभा क्षेत्र भी जातीय समीकरण के हिसाब से मुस्लिमों के लिए बेहतर मानी जाती है। 

जाहिर सी बात है कि बड़े राजनेताओं की सियासी महत्वाकांक्षाएं कम नहीं होती है। चूंकि नसीमुद्दीन सिद्दीकी का प्रोग्राम रामनगर क्षेत्र में लगा था, तो कयास ये लगाए जाने लगे कि कहीं नसीमुद्दीन के निशाने पर कुर्सी के बाद विकल्प के तौर पर रामनगर विधानसभा क्षेत्र तो नहीं है। खैर ये सब तो कयास हैं, लेकिन कयासों ने अगर अमली जामा पहना तो किसी ना किसी को तो बलि का बकरा बनना पड़ेगा। लेकिन ये सब अभी दूर की बात है। लेकिन इन सबके बीच एक चीज जो तय है, वो है वर्चस्व की जंग और गुटबाजी की। जो 16 मार्च सोमवार मैलारायगंज में इफ्तार के दौरान स्पष्ट तौर पर नजर आई। इस रोजा इफ्तार में स्थानीय सपा सांसद ने शिरकत नहीं की, उन्होंने अपनी जगह पर अपने बेटे को भेजा। दूसरा ये कि जिले के एक कद्दावर और इन दिनों सपा के जिले और क्षेत्र में सबसे लोकप्रिय नेता का आधा इफ्तार छोड़कर चले चले जाना इस बात को और पुख्ता करता है। जिस घर से वो आधा कार्यक्रम छोड़ गए वो उनके बहुत भरोसेमंद और करीबी लोगों का कार्यक्रम थी। इससे इस बात को और भी बल मिलता है। 

 कुल मिलाकर ये कि आने वाले दिनों में जिले में सपा में सियासी वर्चस्व और टिकट को लेकर बड़े पैमाने पर मारामारी की उम्मीद है। यहीं नहीं गुटबाजी भी खुलकर देखने को मिलेगी। जो सपा के आलाकमान के माथे पर शिकन तो लाएगी ही, साथ ही सपा के सियासी नतीजों को भी प्रभावित करेगी।

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