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वक़्फ संशोधन बिल के समर्थन में AIPMM, अरशद मदनी पर क्यूं लगाया पसमांदा मुस्लामानों को बरगलाने का आरोप?

 

वक़्फ संपत्ति का हवाला देकर पसमांदा मुसलमानों को बरगला रहे मदनी-वसीम राइन

BARABANKI NEWS.... मौलाना अरशद मदनी एंड कंपनी की सारी दलीलें केवल उनकी मतलबपरस्ती को जाहिर कर रहीं हैं। आज वह पसमांदा मुसलमानों का साथ चाह रहे हैं, तो सवाल खड़ा होता है कि उन्होंने आजादी के बाद से पसमांदा मुसलमानों के साथ क्या किया है। जिसे याद करके उनका साथ दिया जाये, जाहिर है जब उनके वक़्फ़ के कारोबार पर हमला हुआ, तो वह सरकार के खिलाफ अभियान चलाने में जुटे हुए हैं और मुसलमानों को वक़्फ़ संपत्ति का हवला देकर बरगला रहे हैं। पसमांदा मुसलमान सब जान और समझ रहा है, मदनी साहब इस समाज से दूर ही रहें तो बेहतर रहेगा। 
ये बात आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम राईन ने अपने बयान में कही हैं। उन्होंने खासकर कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक की तरह ही तथाकथित स्वघोषित, स्वयंभू मुस्लिम सियासी, मजहबी रहनुमाओं ने कभी पसमांदा मुसलमानों का ख्याल किया होता, तो आज तस्वीर ही कुछ और होती। उन्होंने कहा कि काश, बाबा साहेब द्वारा लिखित संविधान पर लगे संवैधानिक कलंक यानी संविधान के अनुच्छेद 341 में पैरा (3) के जरिए लगी मजहबी पाबंदी को हटाने या मंडल आरक्षण में पिछड़े मुसलमानों को उनके आबादी के अनुपात में हक, हिस्सेदारी दिलाने या उनका कोटा अलग करने के लिए भी कोई ईमेल या जन जागरूकता मुहिम चलाई गई होती, तो फिर देश के 85 फीसदी से ज्यादा पसमांदा मुसलमानों की सियासी, समाजी, माली और तालीमी हालत दलितों से बदतर ना हुई होती। उन्होंने कहा कि दुख की बात यह है कि मौलाना अरशद मदनी ने कभी पसमांदा समाज की हिस्सेदारी के बारे में नहीं सोचा, यूपी में 1 लाख 22 हजार व बंगाल में 1 लाख 44 हजार मिलाकर पूरे देश में वक़्फ़ की कुल 4 लाख 90 हजार संपत्तियां हैं। क्या कभी मदनी साहब ने उन संपत्ति पर गरीब पसमांदा मुसलमान को काबिज होने दिया, कारोबार का मौका दिया, उसकी परेशानी दूर करने की सोंची, जवाब नहीं में है। 

  अव्वल खुद व उनके अशराफ कारिंदे दिल्ली, हैदराबाद आदि तमाम जगहों पर अरबों की वक़्फ़ संपत्ति पर काबिज हैं और कारोबार कर रहें। आज मदनी साहब ई मेल और व्हाट्सप्प का अभियान चला रहें, वह बताए कितने पसमांदा मुसलमानों को उन्होंने ई मेल चलाना सिखवाया। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने कहा कि मौलाना मदनी यह साफ तौर पर जान लें कि वह अगर वक़्फ़ बिल का विरोध कर रहें तो पसमांदा मुसलमान इस बिल के समर्थन में मजबूती के साथ खड़ा है।

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